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राजनीतिक कार्यकर्ता को मुआवजे पर शीर्ष कोर्ट ने मणिपुर सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली, प्रेट्र। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किए गए मणिपुर के एक राजनीतिक कार्यकर्ता लीचोम्बम एरेंड्रो की रिहाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मणिपुर सरकार से उनको मुआवजा देने को लेकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बता दें कि कोरोना के इलाज में गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल पर भाजपा नेताओं की आलोचना करने के कारण लीचोम्बम को गिरफ्तार किया गया था। शीर्ष कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद उन्हें सोमवार शाम रिहा किया गया।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि एक व्यक्ति ने मई माह से अपनी स्वतंत्रता खोई है। याचिकाकर्ता ने लीचोम्बम को जेल में रखे जाने को लेकर मुआवजा मांगा है। पीठ ने कहा कि हम राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं और मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी।

सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि यह मामला तीन माह पहले संज्ञान में आया था और जैसे ही राज्य सरकार को तथ्यों का पता चला तो आरोप हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने लीचोम्बम की रिहाई का विरोध नहीं किया और मामले को अब यहीं खत्म कर दिया जाना चाहिए। लीचोम्बम के पिता की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ता के खिलाफ पांच मामलों का उल्लेख किया गया, लेकिन उनमें किसी पर भी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया, इसलिए उनको मुआवजा दिया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि हम मुआवजे को लेकर नोटिस जारी कर रहे हैं और मेहता से कहा कि आप इस संबंध में अपना जवाब दाखिल कीजिए। बता दें कि याचिका में अदालत से मुकदमे के खर्च के अलावा याचिकाकर्ता और उनके पुत्र के लिए उचित मुआवजा प्रदान करने का भी अनुरोध किया गया था।