वॉशिंगटन: Donald Trump ने गुरुवार को वॉशिंगटन में अपने नए अंतरराष्ट्रीय मंच ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्घाटन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गाजा में युद्धविराम के बाद शांति और स्थिरता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है, हालांकि इसके दायरे को भविष्य में अन्य वैश्विक संकटों तक बढ़ाने की भी बात कही जा रही है।
बैठक का आयोजन United States Institute of Peace के भवन में किया गया, जहां करीब दो दर्जन देशों के नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों में से कई यूरोपीय लोकतांत्रिक देश इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जबकि ट्रंप के वैचारिक सहयोगी माने जाने वाले कुछ नेता मौजूद रहे।
यह पहल उस युद्धविराम के बाद सामने आई है, जिसे अक्टूबर में अमेरिका ने कतर और मिस्र के साथ मिलकर गाजा में दो वर्षों से जारी भीषण संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता कर लागू कराया था। यह संघर्ष 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसके जवाब में इजरायल ने व्यापक सैन्य अभियान चलाया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अब योजना का दूसरा चरण शुरू हो चुका है, जिसमें हमास के निरस्त्रीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायली कार्रवाई में कम से कम 601 लोगों की मौत हो चुकी है।
बैठक में ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक की सहायता प्रतिज्ञाओं का खाका पेश किया। गाजा में अधिकांश इमारतें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। साथ ही, क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilization Force) के गठन पर भी चर्चा हुई।
Indonesia ने इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की इच्छा जताई है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto ने कहा है कि यदि बल को औपचारिक मंजूरी मिलती है तो उनका देश गाजा में 8,000 तक सैनिक भेजने को तैयार है।
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में कहा कि हमास के पास मौजूद छोटे हथियारों, विशेषकर एके-47 राइफलों को जब्त करना आवश्यक है। इजरायल सरकार की ओर से विदेश मंत्री इस बैठक में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
गाजा में प्रशासनिक सुधार की दिशा में पिछले महीने इंजीनियर अली शाअथ के नेतृत्व में एक तकनीकी समिति का गठन किया गया, जो दैनिक शासन कार्यों को संभाल रही है। वहीं, हमास प्रवक्ता हाजेम कासिम ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से अपील की है कि वह इजरायल पर गाजा में कथित उल्लंघनों को रोकने और लंबे समय से जारी नाकेबंदी हटाने के लिए दबाव डाले।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी प्रावधानों के अनुसार, ट्रंप को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर वीटो अधिकार प्राप्त होगा और वे पद छोड़ने के बाद भी इसके प्रमुख बने रह सकते हैं। स्थायी सदस्यता चाहने वाले देशों को एक अरब डॉलर का योगदान देना होगा।
इस पहल में हंगरी और अर्जेंटीना जैसे देशों के नेता भी शामिल हुए हैं, जबकि फ्रांस और कनाडा जैसे पारंपरिक अमेरिकी सहयोगी इसमें शामिल नहीं हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने निमंत्रण ठुकराते हुए कहा कि इस मंच में फिलिस्तीन को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत के साथ ट्रंप प्रशासन ने गाजा से आगे बढ़कर वैश्विक शांति प्रयासों में नई भूमिका निभाने का संकेत दिया है, हालांकि इसकी संरचना और उद्देश्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।








