वॉशिंगटन: United States इस सप्ताहांत तक Iran पर संभावित सैन्य हमले पर विचार कर रहा है, लेकिन Donald Trump ने अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
यह घटनाक्रम उस हाई-प्रोफाइल परमाणु समझौते पर चर्चा के बाद सामने आया है, जिसमें अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने Geneva, Switzerland में मुलाकात की। बुधवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि जिनेवा वार्ता में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अब भी गहरे मतभेद बने हुए हैं।
प्रेस सचिव ने कहा, “थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ मामलों में हम अभी भी काफी पीछे हैं। हमें उम्मीद है कि ईरान अगले कुछ हफ्तों में विस्तृत प्रस्ताव के साथ लौटेगा। राष्ट्रपति स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार करने से पहले कूटनीति ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता है।
व्हाइट हाउस ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ समझौता करना तेहरान के हित में होगा। उधर, ईरान में 28 दिसंबर, 2025 से बड़े पैमाने पर अशांति जारी है। रियाल की कीमत में भारी गिरावट और बढ़ती महंगाई के कारण कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
प्रदर्शन की शुरुआत राजधानी Tehran में दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा काम बंद करने से हुई, जो बाद में पूरे देश में फैल गई। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद इसे व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
शुरुआत में आर्थिक मुद्दों से प्रेरित यह आंदोलन जल्द ही राजनीतिक रंग लेने लगा। प्रदर्शनकारियों ने व्यापक प्रणालीगत बदलाव की मांग करते हुए सरकार के नेतृत्व के खिलाफ तीखे नारे लगाए। दिसंबर और जनवरी के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज होते गए।
सरकार ने हालात काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की और 8 जनवरी, 2026 को देशभर में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दीं—जो पहले कभी नहीं हुआ था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और पीड़ितों के परिजनों के लिए जानकारी साझा करना मुश्किल हो गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका ने ईरानी सरकार द्वारा बल प्रयोग की निंदा की है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया है। वॉशिंगटन ने मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के मद्देनजर ईरानी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंधों का विस्तार भी किया है।
हालांकि, तेहरान ने विदेशी आलोचनाओं को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए खारिज कर दिया। ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका, इजराइल और कुछ यूरोपीय शक्तियों पर देश में अस्थिरता और विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
कूटनीतिक प्रयासों और बढ़ते तनाव के बीच अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बातचीत आगे बढ़ेगी या क्षेत्र में टकराव की स्थिति और गंभीर रूप लेगी।








