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नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प की दिशा में निर्णायक सफलता

सुकमा, 31 मार्च 2026। बस्तर क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सतत सर्चिंग अभियान के दबाव में माओवादियों द्वारा जंगलों में छिपाया गया भारी मात्रा में कैश और हथियारों का डंप बरामद किया गया है। साथ ही, कुल ₹16 लाख के ईनामी दो माओवादी कैडर ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

जिला सुकमा में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में चलाए जा रहे समन्वित अभियान के तहत यह सफलता मिली है। “नक्सल मुक्त बस्तर” के संकल्प को साकार करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा सभी मोर्चों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति” के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सुकमा पुलिस द्वारा “पूना मार्गेम” पुनर्जीवन अभियान संचालित किया जा रहा है।

जंगलों में छिपाया गया था डंप

सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सघन सर्चिंग अभियान के कारण माओवादी अपने हथियार और नगदी जंगलों में छिपाकर पीछे हटने को मजबूर हो गए हैं। आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व माओवादियों से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में यह डंप बरामद किया गया।

बरामद सामग्री

कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित सामग्री बरामद की गई—

  • नगद ₹10 लाख
  • इंसास LMG राइफल – 01 नग
  • AK-47 राइफल – 02 नग
  • .303 राइफल – 03 नग
  • AK-47 के 14 राउंड
  • .303 के 13 राउंड

दो ईनामी माओवादी ने किया आत्मसमर्पण

केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) में सक्रिय रहे दो माओवादी कैडर ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का रास्ता अपनाया। दोनों पर ₹8-8 लाख का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पित माओवादी:

  • जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे (30 वर्ष), ग्राम एलगुंडा
  • सोनी उर्फ माड़वी कोसी (24 वर्ष), ग्राम गोरगुंडा

दोनों माओवादी संगठन की कंपनी नंबर 08 में सक्रिय सदस्य रहे हैं।

पुनर्वास की दिशा में कदम

रक्षित आरक्षी केंद्र सुकमा में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दोनों ने आत्मसमर्पण किया। शासन की नीति के तहत इन्हें आर्थिक सहायता, सुरक्षा, कौशल प्रशिक्षण और सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

पुलिस का बयान

पुलिस अधीक्षक सुकमा ने बताया कि यह कार्रवाई माओवादियों के नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि जिले में माओवादी गतिविधियां लगभग समाप्ति की ओर हैं और अब दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाएं पहुंच रही हैं।

31 मार्च 2026 “नक्सल मुक्त बस्तर” संकल्प की निर्धारित समय-सीमा का अंतिम दिन है। ऐसे में यह सफलता न केवल सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक मजबूत कदम भी मानी जा रही है।

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