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ईरान युद्ध का असर: भारत में एलपीजी सप्लाई पर दबाव, कई शहरों में लाइनें

ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल के बढ़ते संघर्ष के बीच देश में एलपीजी की कथित क़िल्लत का मुद्दा अब सड़क से संसद तक पहुंच गया है। कई शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ग्राहकों की लंबी कतारों की तस्वीरें सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।

गुरुवार को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और एलपीजी संकट पर सरकार से जवाब मांगा। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है और आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से घबराने की अपील करते हुए कहा कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और पैनिक करने की ज़रूरत नहीं है। हालांकि विपक्ष ने सरकार के इन दावों पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि उनकी बात सही हो, लेकिन ज़मीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं।”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत एलपीजी की कमी का सामना कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री लोकसभा में आकर इस पर चर्चा करने से बच रहे हैं।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े आरोपों और एपस्टीन फाइल्स के मुद्दे के कारण प्रधानमंत्री मोदी दबाव में हैं।

इधर एलपीजी संकट का असर आम लोगों के साथ-साथ कारोबार पर भी पड़ने लगा है। देश के कई हिस्सों में रेस्तरां और होटल व्यवसाय को कमर्शियल एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई रेस्तरां ने सीमित मेन्यू या वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल जैसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर इसका असर और गहरा हो सकता है। ऐसे में सरकार के लिए आपूर्ति बनाए रखना और बाज़ार में घबराहट को रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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