जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चटरू वन क्षेत्र में रविवार तड़के सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली, जब पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed (JeM) के दो शीर्ष कमांडरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के तहत की गई, जो White Knight Corps, Jammu and Kashmir Police और Central Reserve Police Force (CRPF) का संयुक्त अभियान है। इस ऑपरेशन के जरिए पिछले कई महीनों से चिनाब घाटी में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया गया।
ड्रोन निगरानी से मिली बढ़त
सूत्रों के अनुसार, चटरू के बर्फ से ढके घने जंगलों में पिछले 15 दिनों से सर्च ऑपरेशन चल रहा था। रविवार सुबह सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की सटीक सूचना मिली, जिसके बाद संयुक्त टीमों ने दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाके में घेराबंदी की।
सेना के ड्रोन ने ऑपरेशन में निर्णायक भूमिका निभाई। हाई-रिजॉल्यूशन फुटेज में तीन आतंकियों को घने जंगल की आड़ में पोजीशन बदलने की कोशिश करते हुए देखा गया। शुरुआती गोलीबारी में दो आतंकी घायल हुए, लेकिन वे चट्टानी इलाके की ओर भागने में सफल रहे।
जैसे ही सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध कच्चे मकान को घेरा, आतंकियों ने भारी फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मौके पर ही ढेर हो गया, जिसकी पहचान बाद में पाकिस्तानी नागरिक और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े सदस्य के रूप में हुई।
सैफुल्लाह बलोच की घेराबंदी
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, मुठभेड़ में फंसे आतंकियों में कुख्यात कमांडर सैफुल्लाह बलोच भी शामिल था। बलोच को ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध कौशल और भर्ती नेटवर्क के लिए जाना जाता था तथा वह लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शवों की हालत खराब होने के कारण औपचारिक पहचान प्रक्रिया जारी है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “इन दो कमांडरों का मारा जाना जैश-ए-मोहम्मद के क्षेत्र को अस्थिर करने की साजिशों पर बड़ा झटका है। हम पुष्टि कर रहे हैं कि क्या सैफुल्लाह बलोच मृतकों में शामिल है।”
दुर्गम भूगोल, चुनौतीपूर्ण अभियान
मुठभेड़ स्थल खड़ी ढलानों और घने जंगलों से घिरा है, जो आतंकियों को प्राकृतिक छिपाव प्रदान करता है। सुरक्षाबलों ने बहु-स्तरीय घेरा बनाकर अत्याधुनिक तकनीक की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी।
मुठभेड़ के दौरान एक घुमंतू झोपड़ी में छिपे आतंकियों के कारण आग लग गई, जिसके बाद दो जले हुए शव बरामद किए गए।
किश्तवाड़ में बढ़ी आतंकी गतिविधियां
पिछले कुछ महीनों में किश्तवाड़ और विशेष रूप से चटरू क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों में इजाफा देखा गया है। जनवरी में इसी इलाके में एक अभियान के दौरान विशेष बलों के एक जवान ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
आज की इस सफलता को सीमा पार से संचालित भर्ती और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। सुरक्षाबलों का कहना है कि क्षेत्र में तलाशी अभियान अभी जारी है और किसी भी संभावित खतरे को समाप्त करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।








