मंगोलिया के दक्षिण में स्थित दूरस्थ घास के मैदानों में चरवाहों (भेड़ पालकों) की नौकरी के लिए दिया गया एक साधारण विज्ञापन चीनी सोशल मीडिया पर अचानक वायरल हो गया। किसान मालिक झुओ शियाओयांग ने मंगोलिया सीमा क्षेत्र के पास भेड़ों की देखभाल के लिए दो लोगों की आवश्यकता बताते हुए यह विज्ञापन पोस्ट किया था, और उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि यह इतना लोकप्रिय हो जाएगा।
कुछ ही घंटों में यह पोस्ट चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर ट्रेंडिंग में शीर्ष पर पहुंच गया और इसे लगभग 5.9 करोड़ (59 मिलियन) व्यूज़ मिले। इस नौकरी के लिए 700 से अधिक लोगों ने आवेदन किया। आवेदकों में शंघाई और चोंगकिंग जैसे बड़े शहरों के व्हाइट-कॉलर कर्मचारी, फैक्ट्री श्रमिक और हाल ही में स्नातक हुए विश्वविद्यालय छात्र भी शामिल थे।
इस नौकरी की आकर्षक सैलरी ने लोगों का ध्यान खींचा। इस पद के लिए लगभग 1.10 लाख रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा था, जो चीन की कई निजी कंपनियों के औसत वेतन लगभग 70,000 रुपये से काफी अधिक है। इसके अलावा, कंपनी की ओर से मुफ्त आवास और मुफ्त राशन (ग्रॉसरी) की सुविधा भी दी जा रही थी।
हालांकि, यह काम बेहद कठिन परिस्थितियों वाला है। गर्मियों में चयनित कर्मचारियों को लगभग 4,900 एकड़ के क्षेत्र में लगभग 3,000 भेड़ों की देखभाल करनी होगी। सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, ऐसे में उन्हें वहीं रहकर जमाने वाली ठंड में पशुओं की देखभाल और सफाई करनी होती है। इस नौकरी में साल भर लगभग पूरी तरह अकेले रहना भी शामिल है।
झुओ ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह विज्ञापन इतना वायरल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आवेदकों में लगभग दसवां हिस्सा हाल ही में स्नातक हुए छात्र थे, जबकि कई लोग कर्ज और बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिक्रिया चीन के वर्तमान रोजगार बाजार की कठिन स्थिति को दर्शाती है।
इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के बावजूद, झुओ ने अंततः 1980 के दशक में जन्मे दो मध्यम आयु वर्ग के दंपतियों को चुना, जिनके पास पहले से खेती का अनुभव था और जो कठिन परिस्थितियों तथा अकेलेपन को संभाल सकते थे, न कि शहरों के युवा पेशेवरों को।








