नई दिल्ली: देश के प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में हाल के महीनों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि रियल एस्टेट क्षेत्र किसी संकट का सामना नहीं कर रहा है। उनका मानना है कि बिक्री में कमी का सबसे बड़ा कारण मध्यम वर्ग के लिए किफायती घरों की उपलब्धता का अभाव है, न कि मांग में कमी।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में आवासीय बिक्री पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में छह प्रतिशत घट गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट मांग कम होने का संकेत नहीं, बल्कि लोगों की खरीद क्षमता घटने का परिणाम है।
दूसरी ओर, रियल एस्टेट डेवलपर्स का बाजार पर भरोसा कायम है। अप्रैल-जून तिमाही में देशभर में लगभग 1.06 लाख नए आवासीय यूनिट बाजार में लॉन्च किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में सात प्रतिशत अधिक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बेहतर बुनियादी ढांचा और अपना घर खरीदने की लोगों की इच्छा भविष्य में इस क्षेत्र को मजबूती प्रदान करेगी।
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि डेवलपर्स का अधिक ध्यान लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग परियोजनाओं पर केंद्रित होने के कारण मध्यम वर्ग और सामान्य आय वाले लोगों के लिए किफायती घरों का निर्माण कम हो गया है। इससे सबसे अधिक मांग वाले वर्ग के लिए आवास की उपलब्धता सीमित हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरों की बढ़ती कीमतें, होम लोन पर ब्याज दरों का बोझ, निर्माण लागत में वृद्धि, स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क ने मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाल दिया है। यहां तक कि प्रति माह लगभग एक लाख रुपये कमाने वाले परिवारों के लिए भी बड़े शहरों में घर खरीदना कठिन होता जा रहा है।
इस स्थिति के कारण कई खरीदार फिलहाल घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं, जबकि कुछ लोग छोटे घरों या शहरों के बाहरी इलाकों में स्थित परियोजनाओं का विकल्प चुन रहे हैं। इसका असर प्रमुख शहरी क्षेत्रों में घरों की बिक्री पर भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेवलपर्स किफायती आवास परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दें, होम लोन सुविधाओं को आसान बनाया जाए, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार किया जाए और बुनियादी ढांचे का विकास तेज किया जाए, तो रियल एस्टेट बाजार फिर से गति पकड़ सकता है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि देश में घरों की मांग अभी भी बनी हुई है। असली चुनौती लोगों की घटती खरीद क्षमता है। यदि किफायती आवास पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो आने वाले समय में रियल एस्टेट बाजार फिर से मजबूत विकास दर्ज कर सकता है।








