देश में बेरोजगारी दर एक बार फिर बढ़ गई है। अप्रैल 2026 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। मार्च महीने में यह दर 5.1 प्रतिशत थी। हालांकि, इस दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी घटकर पिछले 12 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई, जो राहत की बात मानी जा रही है।
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में कमी रही।
ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर मार्च के 4.3 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.6 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी 6.8 प्रतिशत से घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ गई, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
शहरी महिलाओं के लिए रोजगार की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। शहरी महिला बेरोजगारी दर मार्च के 9.0 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 8.5 प्रतिशत हो गई, जो एक साल का न्यूनतम स्तर है। वहीं, शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर भी 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.9 प्रतिशत पर आ गई।
हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को अब भी रोजगार बाजार में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देशभर में महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई, जबकि पुरुषों की बेरोजगारी दर 5.0 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिपोर्ट में श्रम भागीदारी दर में गिरावट पर भी चिंता जताई गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) मार्च के 55.4 प्रतिशत से घटकर अप्रैल में 55.0 प्रतिशत रह गया। इसी तरह वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) भी 52.6 प्रतिशत से घटकर 52.2 प्रतिशत हो गया।
महिलाओं की श्रम भागीदारी दर घटकर 33.9 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है। आंकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां सुधर रही हैं, लेकिन ग्रामीण भारत अब भी रोजगार सृजन के दबाव का सामना कर रहा है।








