कुमामोटो (जापान): जापान के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र क्यूशू द्वीप के कुमामोटो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के दो दिन बाद भी राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। इस विनाशकारी आपदा में अब तक 25 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं और कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मृतकों के अलावा नौ अन्य मौतों की भी जांच की जा रही है, जिनका संबंध भूकंप से होने की आशंका है। इस हादसे में कम से कम 86 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पांच की हालत गंभीर बनी हुई है।
हजारों लोग राहत शिविरों में
भूकंप से बड़ी संख्या में मकान क्षतिग्रस्त हो गए, बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई तथा हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी।
करीब 19,000 घरों में बिजली आपूर्ति अभी भी ठप है, जबकि 9,000 से अधिक लोग लगभग 400 राहत शिविरों में रह रहे हैं। कई इलाकों में अब भी पेयजल संकट बना हुआ है और लगातार आ रहे झटकों के कारण लोग अपने घर लौटने से डर रहे हैं।
भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
राहत कार्यों के बीच बढ़ती गर्मी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। जापान के पर्यावरण मंत्रालय ने कुमामोटो क्षेत्र के लिए हीटस्ट्रोक अलर्ट जारी किया है, जहां तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
चिकित्सकों की विशेष टीमें राहत शिविरों में बुजुर्गों, बच्चों और घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं।
डॉ. युताका कोबायाशी, जिन्हें आइची प्रांत से राहत कार्यों में सहयोग के लिए भेजा गया है, ने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक से बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
कई लोग कारों और टेंट में रहने को मजबूर
कुमामोटो के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हिकावा कस्बे में कई परिवार अब भी बिना बिजली और पानी के जीवन गुजार रहे हैं।
66 वर्षीय योशिआकी नाकाशिमा ने बताया कि लगातार आ रहे झटकों के डर से वह अपने घर की बजाय कार में रात बिता रहे हैं।
उन्होंने कहा, “कार में सोना आसान नहीं है, लेकिन घर लौटने से ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है।”
वहीं अकीको इनाजाकी नामक महिला अपने क्षतिग्रस्त घर के बाहर लगाए गए टेंट में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि पानी की भारी कमी के कारण हर बूंद कीमती हो गई है।
उन्होंने बताया कि कम पानी पीने की वजह से उन्हें हीटस्ट्रोक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा।
स्थानीय प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि राहत शिविरों में उपलब्ध आपातकालीन खाद्य सामग्री, जैसे इंस्टेंट चावल और डिब्बाबंद ब्रेड, तेजी से समाप्त हो रही है।
मॉल विस्फोट और फैक्ट्री हादसे में कई लोगों की मौत
भूकंप के दौरान सबसे अधिक नुकसान काशिमा स्थित एयॉन मॉल (Aeon Mall) में हुआ। भूकंप के समय वहां हजारों लोग मौजूद थे। प्रशासन ने लगभग 3,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इसके बाद मॉल के एक हिस्से में विस्फोट हो गया और दूसरी मंजिल का हिस्सा ढह गया, जिससे कई लोग मलबे में दब गए।
अधिकारियों के अनुसार, मॉल हादसे में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बचाव अभियान अभी भी जारी है।
वहीं यात्सुशिरो क्षेत्र में निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज के कारखाने की ऊंची चिमनी गिरने से आठ कर्मचारियों की मौत हो गई। दस लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है।
सरकारी और सैन्य एजेंसियों द्वारा जारी वीडियो में बचाव दल भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास करते दिखाई दिए।
प्रधानमंत्री ने राहत कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि केंद्र सरकार राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रही है तथा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, गैस, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “जमीन पर लोगों की जरूरतें लगातार बदल रही हैं। प्रभावित लोगों के मन से डर और अनिश्चितता दूर करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी।”
बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को खोजने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। हालांकि, लगातार आ रहे झटके और भीषण गर्मी राहत कार्यों को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।








