हैदराबाद: छोटे पर्दे पर दिखाई देने वाली चमक-दमक के पीछे काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों और अन्य श्रमिकों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। टीवी सीरियल निर्माण से जुड़े कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और कई बार 15 से 18 घंटे तक लगातार काम करना पड़ता है।
कर्मचारियों के अनुसार, कई लोग सुबह करीब 7:30 बजे काम शुरू कर रात 10 बजे से लेकर आधी रात तक काम करते हैं। वॉयस रिकॉर्डिंग से लेकर वीडियो एडिटिंग, कोऑर्डिनेशन और डबिंग तक विभिन्न विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव रहने की बात सामने आई है।
कर्मचारियों का कहना है कि अत्यधिक काम के दबाव का असर उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कुछ कर्मचारियों के अनुसार, बीमारी या अत्यधिक थकान के बावजूद काम जारी रखना पड़ता है।
साप्ताहिक अवकाश की मांग
कर्मचारियों का आरोप है कि कई टीवी प्रोडक्शन यूनिटों में नियमित साप्ताहिक अवकाश की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि काम के घंटों और छुट्टियों को लेकर पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक काम के घंटों पर सवाल उठाता है तो उसे काम से हटाने की धमकी दी जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले कई कर्मचारी रोजगार खोने के डर से अपनी समस्याएं खुलकर सामने नहीं रख पाते।
त्योहारों पर भी काम का दबाव
कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण त्योहारों और राष्ट्रीय अवसरों पर छुट्टियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संक्रांति, गणतंत्र दिवस, महाशिवरात्रि, उगादी, होली, गुड फ्राइडे, रमजान, अंबेडकर जयंती, श्रीराम नवमी, मई दिवस, तेलंगाना स्थापना दिवस, बकरीद, स्वतंत्रता दिवस, विनायक चविथी, गांधी जयंती, दशहरा, दीपावली और क्रिसमस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर लागू होने वाली छुट्टियों और श्रम नियमों का उचित पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों और छुट्टियों की जानकारी तथा उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
वेतन में देरी का भी आरोप
कुछ कर्मचारियों ने टीवी सीरियल निर्माण से जुड़े कुछ प्रोड्यूसरों पर वेतन में देरी करने का आरोप भी लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार भुगतान में महीनों की देरी होने से परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।
दैनिक या प्रोजेक्ट आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय पर वेतन मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि मेहनत का भुगतान समय पर होना चाहिए और इसके लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था जरूरी है।
निगरानी की जरूरत
टीवी इंडस्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों का सवाल है कि उनके कार्यस्थल की परिस्थितियों और श्रम अधिकारों की निगरानी कौन करेगा।
कर्मचारियों ने तेलंगाना सरकार और श्रम विभाग से मांग की है कि टीवी और मनोरंजन उद्योग से जुड़े कार्यस्थलों की स्थिति की जांच की जाए तथा लागू श्रम नियमों के अनुसार काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश, वेतन भुगतान और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उचित कार्रवाई की जाए।
हालांकि, किसी विशेष प्रोड्यूसर या प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच किया जाना आवश्यक है।
पीछे काम करने वालों की आवाज कौन सुनेगा?
टीवी स्क्रीन पर कलाकारों की चमक दिखाई देती है, लेकिन उस कार्यक्रम को तैयार करने के पीछे कैमरा टीम, एडिटर, लाइट टेक्नीशियन, मेकअप आर्टिस्ट, डबिंग कलाकार, कोऑर्डिनेटर, ड्राइवर और अन्य सैकड़ों कर्मचारी मेहनत करते हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि मनोरंजन उद्योग की सफलता के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों के अधिकारों और सम्मान की भी रक्षा होनी चाहिए।
अब कर्मचारियों की निगाहें श्रम विभाग और सरकार की कार्रवाई पर हैं। उनका कहना है कि उन्हें केवल काम करने वाले हाथ नहीं, बल्कि अधिकारों और सम्मान वाले श्रमिक के रूप में देखा जाना चाहिए।








