इस्लामाबाद: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को खत्म करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को पाकिस्तान में होने वाली अहम शांति वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। क्षेत्रीय हालात तेजी से बदलने के कारण बैठक के आयोजन पर सवाल उठ रहे हैं।
दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। इस बैठक में स्थायी शांति समझौते के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं, ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत उसकी 10 सूत्रीय योजना के आधार पर ही होनी चाहिए।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जो वॉशिंगटन से रवाना हो चुके हैं। दूसरी ओर, ईरान ने अपने प्रतिनिधियों की जानकारी गोपनीय रखी है। पहले ईरान के राजदूत रज़ा अमीर ने 10 सदस्यीय दल के आने की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना बयान सोशल मीडिया से हटा लिया, जिससे संदेह और बढ़ गया।
लेबनान पर इज़राइल के हवाई हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और संकेत दिया है कि ऐसे हालात में वार्ता आगे बढ़ना मुश्किल होगा। ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने भी इसी तरह की चिंता जताई।
इसी बीच, अमेरिकी नौसेना का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में लापता हो गया। फ्लाइटरडार24 के अनुसार, आपातकालीन संकेत देने के बाद ड्रोन रडार से गायब हो गया। यह स्पष्ट नहीं है कि वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया। करीब 200 मिलियन डॉलर की लागत वाला यह ड्रोन खाड़ी क्षेत्र में निगरानी कर रहा था।
क्षेत्रीय तनाव का असर तेल उत्पादन पर भी पड़ा है। सऊदी अरब ने अपने तेल उत्पादन को भारी नुकसान होने की बात कही है, जबकि कुवैत ने ईरान समर्थित समूहों पर हमले जारी रखने का आरोप लगाया है।
इन घटनाओं के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व सहयोगियों—टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडेस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स—की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग अप्रत्यक्ष रूप से ईरान का समर्थन कर रहे हैं।
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी है। रेड ज़ोन में पाबंदियां लागू की गई हैं, छुट्टियां घोषित की गई हैं और नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
कुल मिलाकर, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और इन बहुप्रतीक्षित शांति वार्ताओं का भविष्य अब भी अनिश्चित है।








