हैदराबाद: तेलंगाना आंदोलन के वरिष्ठ योद्धा, समाजवादी नेता और तेलंगाना लोक कलाकार संरक्षण संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) के अध्यक्ष मुरलीधर देशपांडे का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में गहरा शोक व्याप्त है। विभिन्न दलों के नेताओं, आंदोलनकारियों और लोक कलाकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मुरलीधर देशपांडे तेलंगाना राज्य गठन आंदोलन के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे जिन्होंने आंदोलन के प्रथम चरण से लेकर राज्य गठन तक सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अपना पूरा जीवन तेलंगाना की अस्मिता, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
तेलंगाना लोक कलाकार संरक्षण जेएसी के अध्यक्ष के रूप में देशपांडे ने हजारों लोक कलाकारों को एक मंच पर संगठित किया। उनका मानना था कि लोक संस्कृति और कला किसी भी जन आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत होती है। उनके नेतृत्व में लोक कलाकारों ने तेलंगाना आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोक गीतों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से तेलंगाना की पहचान और अधिकारों की आवाज को मजबूत किया गया।
समाजवादी विचारधारा से प्रेरित देशपांडे हमेशा गरीबों, मजदूरों और लोक कलाकारों के हितों के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं को लगातार उठाया और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास किए।
वे केवल एक आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों के मार्गदर्शक भी थे। उनकी सादगी, जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता और संघर्षशील व्यक्तित्व ने उन्हें जनता के बीच विशेष सम्मान दिलाया।

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। बीआरएस एमएलसी के. कविता ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मुरलीधर देशपांडे ने अपना संपूर्ण जीवन तेलंगाना की आकांक्षाओं, संस्कृति और आम जनता के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
तेलंगाना आंदोलन के कई वरिष्ठ नेताओं और लोक कलाकारों ने उनके निधन को राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उनका कहना है कि देशपांडे ने लोक संस्कृति को आंदोलन की शक्ति में बदलकर तेलंगाना इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।
मुरलीधर देशपांडे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन तेलंगाना आंदोलन में उनका योगदान, लोक कलाकारों के लिए उनका संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनका जीवन त्याग, संघर्ष और जनसेवा का प्रतीक था, जिसे तेलंगाना हमेशा याद रखेगा।








