हैदराबाद: प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर ने हाल ही में हुए ‘संसद चलो’ छात्र आंदोलन से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियों का स्वागत किया है।
सुधाकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाली हैं। उन्होंने अदालत की इस टिप्पणी की सराहना की कि “सुनना सबसे बड़ा हथियार है।” उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए तथा भटके हुए युवाओं के साथ बल प्रयोग करने के बजाय उन्हें परामर्श और संवाद के माध्यम से समझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह सिद्धांत कि “हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकती” देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। इससे सरकारों और पुलिस तंत्र को विरोध प्रदर्शनों से संयम और संवेदनशीलता के साथ निपटने में सहायता मिलेगी।
सुधाकर ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो तथा पीसीआर लॉग सुरक्षित रखने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये निर्देश पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही प्रदर्शनकारियों की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक न करने का निर्देश नागरिकों की निजता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगा।
उन्होंने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले नाबालिग छात्रों को तुरंत रिहा करने तथा सामान्य छात्रों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई न करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी युवाओं के लिए बड़ी राहत है। राज्य सरकारों को उपयुक्त मामलों में एफआईआर वापस लेने की स्वतंत्रता संबंधी अदालत की स्पष्टता भी स्वागत योग्य है।
सुधाकर ने कहा कि लाठीचार्ज की घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने के प्रति सुप्रीम कोर्ट की तत्परता न्यायपालिका में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों तथा पुलिस विभागों से अपील की कि वे सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों को पूरी निष्ठा के साथ लागू करें।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान दमन से नहीं, बल्कि संवाद और सहमति से होना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों से संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करने तथा देश के भविष्य के निर्माण में युवाओं को सक्रिय भागीदार बनाने का आह्वान किया।








