नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कार्यरत अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने हाल ही में लागू किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की उन धाराओं को चुनौती दी है, जिनमें वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) का प्रावधान किया गया है।
इस मामले के प्रमुख याचिकाकर्ता सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट बिभोर कुमार सिंह हैं, जिन्हें वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2022 में बिहार में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान उन्होंने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को होगी।
क्या है विवाद?
संसद द्वारा 2 अप्रैल 2026 को पारित और 9 अप्रैल 2026 से लागू इस कानून के अनुसार—
- इंस्पेक्टर जनरल (IG) के 50% पद IPS अधिकारियों से भरे जाएंगे।
- अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम-से-कम 67% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे।
- स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) और डायरेक्टर जनरल (DG) के सभी पद IPS अधिकारियों द्वारा प्रतिनियुक्ति पर भरे जाएंगे।
याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम की धारा 3 और धारा 4 को संविधान के विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से 23 मई 2025 के संजय प्रकाश बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले को लागू करने की मांग की है।
उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने CAPF के ग्रुप-ए एग्जीक्यूटिव कैडर अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप-ए सर्विस का दर्जा देते हुए IG स्तर तक IPS प्रतिनियुक्ति को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कम करने और छह महीने के भीतर सेवा एवं कैडर नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद भी सरकार ने मार्च 2026 में नया विधेयक लाकर कानून बना दिया, जिसे याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने वाला बता रहे हैं।
CAPF अधिकारियों की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सभी CAPF में हायर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (HAG) के पद संबंधित बलों के योग्य अधिकारियों को पदोन्नति के आधार पर दिए जाएं, न कि केवल IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से।
यह कानून CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB पर लागू होता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला CAPF के वरिष्ठ नेतृत्व और पदोन्नति व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है.








