नई दिल्ली: संसद ने गुरुवार को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। राज्यसभा से बुधवार को पारित होने के बाद लोकसभा ने भी विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से इस विधेयक को पारित कर दिया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।
इस संशोधन के लागू होने के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा जो वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’, राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संविधान को प्राप्त है।
वंदे मातरम् के गायन में बाधा डालना होगा दंडनीय अपराध
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या किसी सभा में इसके गायन के दौरान बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति दोबारा ऐसा अपराध करता है, तो उसे कम से कम एक वर्ष की सजा अनिवार्य रूप से दी जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी भी नागरिक के लिए ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य नहीं बनाता, बल्कि केवल जानबूझकर इसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करने को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ का दिया गया उल्लेख
विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में सरकार ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उस ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समान सम्मान प्राप्त होगा।
सरकार ने यह भी कहा कि यह कदम ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उठाया गया है।
ओवैसी ने किया विधेयक का विरोध
विधेयक पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसका कड़ा विरोध किया।
ओवैसी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ में देवी-देवताओं की आराधना का उल्लेख है, जो उनके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 की भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ देश और उसके नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ की प्रकृति अलग है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय गीत की कोई स्पष्ट संवैधानिक परिभाषा नहीं है और इसे लेकर उनकी वैचारिक आपत्ति है।
सरकार ने विरोध को बताया अनुचित
विधेयक का समर्थन करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक रहे ‘वंदे मातरम्’ का विरोध उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारत की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
लोकसभा में विपक्ष के कुछ दलों, विशेष रूप से अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने इस विधेयक को लेकर आपत्ति जताई और इसे हिंदुत्व एजेंडा से जोड़ते हुए विरोध दर्ज कराया।
वहीं, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी राज्य, भाषा, धर्म या विचारधारा को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों तथा उनकी भाषाई और सांस्कृतिक अस्मिता का समान सम्मान करती है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हो जाएगा और ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। इसके बाद राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना कानूनन दंडनीय अपराध माना जाएगा।








